मंगलवार, जून 27, 2006

कुछ इधर उधर की

पुरस्कार के साथ साथ "सबसे सक्रिय हिंदी चिट्ठाकार" की पदवी पाने का पढ़ कर अचरज भी हुआ, खुशी भी. जिसने भी मेरे चिट्ठे को इस योग्य समझा, उन सब को धन्यवाद.
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लिखनेवाले के लिए सबसे बड़ी सुख होता है उसे पढ़नेवालों की राय जानना. इस दृष्टि से चिट्ठा लिखना, लेखन की अन्य सभी विधाओं से बेहतर है क्योंकि पढ़ने वाले चाहें तो सीधा ही उसपर अपनी राय दे सकते हैं.

बचपन में हिंदी लेखिका शिवानी मुझे बहुत पसंद थीं, पर उनसे कभी सीधा कोई सम्पर्क नहीं हुआ. फ़िर कुछ वर्ष पहले छोटी बहन से सुना कि अमरीका में शिवानी जी उसके ही क्लिनिक में साथ काम करने वाले एक डाक्टर की सम्बंधीं हैं और उनके घर पर ठहरीं हैं. लगा कि हाँ, अपने प्रिय लेखक से सम्पर्क हो सकता है पर इससे कुछ समय बाद ही मालूम चला कि शिवानी जी नहीं रहीं.

फ़िर अचानक पिछले वर्ष अमरीका से शिवानी जी के पुत्र का संदेश मिला. उन्होंने कल्पना पर शिवानी जी के बारे में मेरा लिखा पढ़ा था जो उन्हे अच्छा लगा था. लगा जैसे कोई पूजा थी, जिसके लिए मुझे वरदान मिल गया हो.
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मैंने अपनी एक इतालवी मित्र को अपनी नई लाल मेज़ और अलमारी के बनाने की कठिनाईओं के बारे में बताया और लिखा कि यह अलमारी मेरे लिए ताजमहल जैसी है.

मेरी मित्र ने मुझे उत्तर में लिखा है, "मैंने शब्दकोश में ढूँढा, वहाँ लिखा है कि ताजमहल मुगल भवन निर्माण कला का उच्च उदाहरण है जिसे एक राजा ने अपनी रानी की कब्र के लिए बनवाया था, समझ नहीं आया कि इसका तुम्हारी मेज से क्या सम्बंध हो सकता है, ज़रा ठीक से समझाओ ?"
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आज कल वर्ल्डकप के दिन हैं. जिस दिन इटली का कोई खेल होता है, उस समय सड़कें ऐसे खाली हो जाती हैं जैसे भारत में क्रिकेट के मैच के दौरान होता है, जब भारत खेल रहा हो. हर तरफ सड़कों और घरों पर इटली के झँडे दिखाई देते हैं. जब लगे कि कोई गोल होने वाला है तो हर ओर से ऐसी ध्वनि उठती है जो दूर से सुनाई देती है, और फ़िर अगर गोल हो जाये तो बादलों की गरज जैसी बन जाती है.

कल दोपहर को इटली और आस्ट्रेलिया का मैच था. हर तरफ सन्नाटा था. पर वह गूँजने वाली ध्वनि नहीं थी हर तरफं. जो दिखता, कुछ परेशान सा दिखता. अंतिम मिनट तक वह सन्नाटा रहा फ़िर आखिर जब गोल हुआ तो वह सन्नाटा टूटा. यानि कि अब अगले मैच का इंतज़ार है.

मैंने स्वयं कभी कोई फुटबाल का मैच टेलीविजन पर पूरा नहीं देखा, सिवाय एक बार, 1982 में जब इटली ने वर्ल्डकप जीता था. उस रात का पागलपन अभी तक याद है. उत्तरी इटली के एक छोटे से शहर में रहते थे और लगता था कि सारा शहर सड़कों पर निकल आया था, नाचने गाने के लिए.

अगर बार बार जीत होती रहे तो शायद उत्साह कम हो जाये पर जब कभी कभार हो तो आनंद दुगना हो जाता है.

मुझसे मेरे कुछ इतालवी मित्रों ने पूछा कि अगर फाइनल का मुकाबला इटली और भारत के बीच हो तो मैं किसकी जीत चाहूँगा ? मैंने कहा कि इटली में किसी को क्रिकेट का नाम भी ठीक से नहीं आता, भला फाईनल में साथ कैसे मुकाबला हो सकता है ? वह बोले, नहीं कल्पना करो कि फुटबाल में अगर ऐसा हो तो ?

तब सोच कर मैंने कहा, सच में चाहूँगा कि भारत जीते, क्योंकि कुछ भी हो मन से सबसे पहले भारतीय ही हूँ. पर इससे एक और फायदा यह होगा कि हम लोग क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों के बारे में भी सोचेंगे, पर अगर भारत न भी जीता तो उतना दुख नहीं होगा क्योंकि यह मुकाबला तो माँ पिता का मुकाबले की तरह हुआ, एक तरफ वह देश है जिसने जन्म दिया, दूसरी ओर ससुराल का देश है.



16 टिप्‍पणियां:

  1. पुरुस्कार के लिये ढेरों बधाइयाँ...बस आप नियमित लिखते रहें और हम नियमित पढते रहें

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  2. इंडिक ब्लॉगर अवार्ड प्राप्त होने पर हार्दिक बधाई!

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  3. ...मेरी मित्र ने मुझे उत्तर में लिखा है, "मैंने शब्दकोश में ढूँढा, वहाँ लिखा है कि ताजमहल मुगल भवन निर्माण कला का उच्च उदाहरण है जिसे एक राजा ने अपनी रानी की कब्र के लिए बनवाया था, समझ नहीं आया कि इसका तुम्हारी मेज से क्या सम्बंध हो सकता है, ज़रा ठीक से समझाओ ?"...

    मिस-अंडरस्टैंडिंग का सटीक उदाहरण :)

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  4. बधाई.

    आप मेरे प्रिय लेखक हैं.

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  5. पुरुस्कार के लिये बधाई|
    शिवानी जी की छोटी पुत्री सुश्री इरा पान्डे जी ने शिवानी जी की जीवनी Diddi नाम से लिखी है पर यह अंग्रेजी मे है, शायद यह हिन्दी मे होती तो ठीक रहता है|

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  6. हमारी ओर से भी बधाई स्वीकारें.
    पुरस्कार प्राप्ति पर अचरज कैसा? अगर आपको नहीं मिलता तब मुझे आश्चर्य होता.
    शिवानीजी का एक उपन्यास पढ़ा था "चौदह फेरे", तब यह नहीं पता था कि वे हमारे नजदीक वडोदरा कि निवासी हैं. एक दिन पढ़ा "लेखिका शिवानी नहीं रही", बेहद दुख हुआ था.
    इसी लोकप्रिय हिन्दी लेखिका कि जीवनी अंग्रेजी में लिखी गई हैं! आश्चर्य!!

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  7. आपकी प्रिय लेखिका के लेखन का प्रभाव आपके लेखन में साफ झलकता है ,वही सरल और सुरुचिपूर्ण अन्दाज़ । पुरुस्कार के लिए बधाई । यदि न मिलता तो हैरानी होती ।

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  8. पुरस्कृत होने के लिये बथाई सुनील जी !

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  9. प्रेमलता पांडे27 जून 2006 को 6:57 pm

    पुरस्कार की बधाई।
    -प्रेमलता

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  10. सुनील जी,
    पुरस्कार पाने के लिये हार्दिक बधाई।
    आप सही मायनो मे "सबसे सक्रिय हिंदी चिट्ठाकार" है। आपका कोई भी लेख ऐसा नही है जो मैने नही पढा है। आप के संसमरण इतने रोचक और सरल होते है कि मै उन्हे कई बार पढ जाता हूं ।

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  11. सुनील जी

    मिर्ची सेठ की बधाई भी स्वीकार करें.

    पंकज

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  12. Sabse sakriya hi nahin,sabse meaningful bhi.Mubarak ho,tahe-dil se!Puraskar main kya mila?Kya aap jante hain ki Shivaniji ki badi putri Mrinal Pande hain aur unka apna asli naam Gaura tha?Woh Kumaon Hills se thaaen,like all Pandes...not to be confused with Pandey.

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  13. सुनील जी मेरी बधाई भी स्वीकारें। इन पुरस्कारों पर विश्वास मेरे मन में कम है। कोई पुरस्कार मिले, न मिले, मुझे आप का चिट्ठा सब से बेहतरीन लगता है।

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  14. आपके सारे लेख एक सॉस में पढता हूँ।
    कुछ जैसे "समयचक्र" तो न जाने कितनी बार पढ चुका हूँ।
    मंगल गीत।
    पुष्प वर्षा।
    बधाइयॉ ही बधाइयॉ।

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  15. रमण कौल की बात को दोहराते हुये फिर से बधाई।

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  16. सुनील जी,पुरुस्कार के लिये ढेरों बधाइयाँ। इस बात की खुशी है कि मैं भी शिवानी जी के ही शहर से हूँ। उनकी एक बेटी काफी पहले दूरदर्शन में न्यूज रीडर थीं।

    आशा है आप ऐसे ही लिखते रहेंगे।

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"जो न कह सके" पर आने के लिए एवं आप की टिप्पणी के लिए धन्यवाद.

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